| यतन्तः |
| यतन्तोऽप्यकृतात्मानो |
| यत्1{कृत्_प्रत्ययः:शतृ;यतीँ;भ्वादिः;पुं}{1;बहु} |
| यत्{कृत्_प्रत्ययः:शतृ;यतीँ;भ्वादिः;पुं}{1;बहु} |
| - |
| - |
| विशेषणम् 12 |
| - |
| यत्न_करते_रहने_पर |
| endeavoring |
| शास्त्रश्रवणादिभिरात्मदर्शनाय यत्नं कुर्वाणां यतन्तः |
| रुत्व-उत्व-गुण-पूर्वरुप-सन्धिः (ससजुषो रुः (8।2।66)-अतो रोरप्लुतादप्लुते (6।1।113)-आद्गुणः (6।1।87)-एङः पदान्तादति (6।1।109)) / यण्-सन्धिः (इको यणचि (6।1।77)) / रुत्व-उत्व-गुण-सन्धिः (ससजुषो रुः (8।2।66)-हशि च (6।1।114)-आद्गुणः (6।1।87)) |
| LGGLLGGG |