| कर्तुम्_व्यवसिताः |
| कर्तुं_व्यवसिता |
| व्यवसित{पुं}{1;बहु}/व्यवसिता{स्त्री}{1;बहु}/व्यवसिता{स्त्री}{2;बहु} |
| कृ{कृत्_प्रत्ययः:तुमुन्;डुकृञ्;तनादिः}_वि_अव_सि1{कृत्_प्रत्ययः:क्त;वि_अव_षिञ्;स्वादिः;पुं}{1;बहु} |
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| करने_को_तैयार_हो_गये_हैं |
| set_our_mind_on_the_commission_of |
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| रुत्व-यत्व-लोप-सन्धिः (ससजुषो रुः (8।2।66)-भोभगोअघो अपूर्वस्य योऽशि (8।3।17)-हलि सर्वेषाम् (8।3।22)) |
| GG |