सुबन्तावली ?ढुण्ढिराजाख्यानRoma |
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| नपुंसकम् | एक | द्वि | बहु |
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| प्रथमा | ढुण्ढिराजाख्यानम् | ढुण्ढिराजाख्याने | ढुण्ढिराजाख्यानानि |
| सम्बोधनम् | ढुण्ढिराजाख्यान | ढुण्ढिराजाख्याने | ढुण्ढिराजाख्यानानि |
| द्वितीया | ढुण्ढिराजाख्यानम् | ढुण्ढिराजाख्याने | ढुण्ढिराजाख्यानानि |
| तृतीया | ढुण्ढिराजाख्यानेन | ढुण्ढिराजाख्यानाभ्याम् | ढुण्ढिराजाख्यानैः |
| चतुर्थी | ढुण्ढिराजाख्यानाय | ढुण्ढिराजाख्यानाभ्याम् | ढुण्ढिराजाख्यानेभ्यः |
| पञ्चमी | ढुण्ढिराजाख्यानात् | ढुण्ढिराजाख्यानाभ्याम् | ढुण्ढिराजाख्यानेभ्यः |
| षष्ठी | ढुण्ढिराजाख्यानस्य | ढुण्ढिराजाख्यानयोः | ढुण्ढिराजाख्यानानाम् |
| सप्तमी | ढुण्ढिराजाख्याने | ढुण्ढिराजाख्यानयोः | ढुण्ढिराजाख्यानेषु |